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सड़क सुरक्षा में सुधार लाने में जमीनी स्तर के हस्तक्षेपों की भूमिका महत्वपूर्ण : उमाशंकर

स्वयंसेवकों से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और जीवन बचाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह खबर है..नई दिल्लीकेंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा कि पूरे देश में सड़क सुरक्षा में सुधार लाने में जमीनी स्तर के हस्तक्षेपों की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। सचिव ने स्वयंसेवकों से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और जीवन बचाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।वे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत आईआईटी मद्रास में स्थापित ‘सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र’ (सीओईआरएस) ने 16-18 मार्च 2026 तक फरीदाबाद में ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ (एसएसएम) स्वयंसेवकों के लिए अपनी पहली प्रत्यक्ष प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के युवाओं को सड़क सुरक्षा में सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में सशक्त बनाना और पूरे देश में युवाओं के नेतृत्व वाला आंदोलन खड़ा करना है। इस तीन-दिवसीय गहन कार्यशाला में 5 राज्यों और 13 जिलों से आए 53 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को ‘जिला सड़क सुरक्षा समितियों’ (डीआरएससी) को तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। ये क्षेत्र हैं – दुर्घटनाओं के समय तत्काल प्रतिक्रिया, सड़क सुरक्षा ऑडिट, और जिला-स्तरीय सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए प्रशासनिक सहायता।सड़क सुरक्षा स्वयंसेवकों और संबंधित पक्षों को संबोधित करते हुए वी. उमाशंकर ने पूरे देश से आए सड़क सुरक्षा नेताओं और स्वयंसेवकों की भागीदारी पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त सीख को जिला स्तर पर ठोस और परिणाम-उन्मुख कार्यों में बदलें।रोकथाम के उपायों के महत्व पर बल देते हुए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव ने कहा कि यद्यपि दुर्घटना के बाद की प्रतिक्रियाएं—जैसे कि सीपीआर देना और आपातकालीन सेवाओं को सूचित करना—अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, तथापि दुर्घटनाओं को पूरी तरह से होने से रोकना ही हमारा प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना का कोई न कोई अंतर्निहित कारण अवश्य होता है, और इन कारणों की पहचान करके उनका समाधान करने से भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने में मदद मिल सकती है।मुख्य आँकड़ों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग 45% मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़ी होती हैं, जिसमें हेलमेट का इस्तेमाल न करना एक बड़ा कारण है। उन्होंने हेलमेट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान तेज़ करने और समुदाय को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग 20% मौतें पैदल चलने वालों की होती हैं। उन्होंने बेहतर बुनियादी ढाँचे तथा ट्रैफ़िक को धीमा करने के उपायों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

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राष्ट्रपति ने अयोध्या में किये श्री रामलला के दर्शन

राष्ट्रपति ने कहा, अयोध्या नगरी की पवित्र धूलि का स्पर्श करना ही उनका परम सौभाग्य खबर है..नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (19 मार्च, 2026) उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाकर राम लला के दर्शन किये। उन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर के भीतर विभिन्न स्थानों पर दर्शन एवं आरती की और श्री राम यंत्र स्थापना और पूजन भी किया।इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या नगरी की पवित्र धूलि का स्पर्श करना ही उनका परम सौभाग्य है, यह वही पवित्र नगरी है जहां प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल संवत्सर 2083 के प्रारंभ और नवरात्रि के पहले दिन यहां उपस्थित होना उनके लिए वास्तव में एक सौभाग्य है।राष्ट्रपति ने कहा कि इस अत्यंत पवित्र श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन, यहां राम लला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण के दिन हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से हम इन लक्ष्यों को 2047 तक, शायद उससे भी पहले, प्राप्त कर लेंगे। 21वीं सदी में, हमारे समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना राम राज्य के वर्णन में प्राप्त होती है। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि राम-राज्य में न कोई दुखी है, न निर्धन है, न परावलंबी है, न बुद्धिहीन है और न ही कोई संस्कारहीन है।राष्ट्रपति ने कहा कि राम राज्य का आदर्श आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है। प्रभु श्री राम के जीवन के अनेक उदाहरण सर्वव्यापी और समावेशी जीवन दर्शन के आदर्श को दर्शाते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समकालीन संदर्भ में सामाजिक समावेश और आर्थिक न्याय सहित राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और उन्हें क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राम राज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे।

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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की निगरानी करेंगे 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात

खबर है..नई दिल्ली निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनावों के लिए 1,111 पर्यवेक्षक तैनात किये हैं।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विधानसभा चुनाव कार्यक्रम घोषित करते हुए कहा था कि चुनाव-हिंसा और प्रलोभन मुक्त कराए जाएं ताकि प्रत्येक मतदाता बिना किसी भय या पक्षपात के अपना वोट डाल सके। इसे सुनिश्चित करने में पर्यवेक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में तैनात 1,111 पर्यवेक्षकों में सामान्य और पुलिस पर्यवेक्षकों शामिल है। आयोग ने पर्यवेक्षकों को कल 18 मार्च, 2026 तक संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में तैनात करने के निर्देश दिए हैं। पर्यवेक्षक पहुंचने पर अपने संपर्क विवरण सार्वजनिक करेंगे और उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों या उनके प्रतिनिधियों या जनता के किसी भी सदस्य के उनसे मिलने और चुनाव संबंधी उनकी शिकायतें सुनने के लिए प्रतिदिन एक निश्चित समय निर्धारित करेंगे।

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एलपीजी वाहक शिवालिक आज पहुंचेगा भारत,नंदा देवी के कल पहुंचने की उम्मीद

घरेलू एलपीजी उत्पादन में 36 प्रतिशत की वृद्धिऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर बुकिंग लगभग 84% से बढ़कर 90% हुई खबर है..नई दिल्ली पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों के मद्देनजर सरकार ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन की उपलब्धता बरकरार रखने में जुटी हुई है। ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाले घरेलू एलपीजी की जबरदस्त मांग के बीच एलजी वाहन शिवालिक आज भारत पहुंचेगी जबकि कल सुबह तक नंदा देवी के भारत पहुंचने की उम्मीद है। घरेलू एलपीजी उत्पादन में फिलहाल 36% की वृद्धि हुई है। हालांकि ऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर बुकिंग 84% से बढ़कर 90% हो गया है। यह इस बात के संकेत है कि आने वाले समय में अगर संकट बरकरार रहा और हो होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहा तो पेट्रोलियम उत्पादों की और खासकर एलजी की मांग और बढ़ेगी।भारत सरकार की ओर से निरंतर की जा रही प्रेस वार्ता के दौरान सरकार की ओर से किए जा रहे हैं उपायों को बताया जा रहा है। भारत सरकार के अधिकारियों के अनुसार सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार बनाए हुए हैं। भारत पेट्रोल और डीजल उत्पादन में आत्मनिर्भर है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इन ईंधनों के आयात की आवश्यकता नहीं है।घरेलू रसोई गैस एलपीजी वितरकों में आपूर्ति बंद होने की कोई सूचना नहीं मिली है। ऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर बुकिंग में लगभग 84% से बढ़कर लगभग 90% की वृद्धि हुई है। बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मणिपुर और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप गैर-घरेलू एलपीजी आवंटित करने के आदेश जारी किए हैं।

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पांच राज्यों में बजा विधानसभा चुनाव का बिगुल

असम, केरल, पुडुचेरी में 9, तमिलनाडु में 23 और पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदानइन सभी पांच राज्यों के चुनाव परिणाम एक साथ 4 मई को आएंगे खबर है..नई दिल्ली निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज कर दिया है। असम, केरल, पुडुचेरी में 9 अप्रैल, तमिलनाडु में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होंगे जबकि इन सभी पांचो राज्यों के चुनाव परिणाम एक साथ 4 मई को घोषित किए जाएंगे।मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आज रविवार 15 मार्च को विज्ञान भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराया जाने के लिए कार्यक्रम का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि इन सभी राज्यों में निष्पक्ष एवं निर्भीक चुनाव कराने के लिए आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। चुनाव आयोग की ओर से यहां व्यवस्था की गई है की किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न हुए बिना शांतिपूर्ण ढंग से मतदान कराया जाए। इसके लिए चुनाव आयोग ने इन सभी राज्यों में पर्याप्त संख्या में मतदान कर्मियों और सुरक्षा कर्मियों का इंतजाम किया है। मतदान सुचारू रूप से संपन्न किए जाएं इसलिए चुनाव आयोग में सभी मतदान केदो पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी ना हो।मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 2 करोड़ 50 लाख मतदाता, केरल की 140 सीटों के लिए 2 करोड़ 70 लाख मतदाता, पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों के 9 लाख 44 हजार मतदाता, तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए 5 करोड़ 67 लाख मतदाता और पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए 6 करोड़ 44 लाख मतदाता मतदान करेंगे। इन सभी 924 सीटों के लिए 17 करोड़ 4 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। उन्होंने बताया कि इन मतदाताओं के लिए असम में 31486, केरल में 30471, पुडुचेरी में 1099, तमिलनाडु में 75032 और पश्चिम बंगाल में 80719 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

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फास्टैग वार्षिक पास शुल्क में मामूली वृद्धि

अब ₹3000 के बजाय 3075 चुकाने होंगे खबर है..नई दिल्लीभारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए फास्टैग वार्षिक पास की लागूशुल्क में मामूली वृद्धि की है। अब मौजूदा शुल्क 3,000 रुपये से बढ़ाकर 3,075 रुपये करने की घोषणा की गई है। बढ़ा हुआ शुल्क एक अप्रैल 2026 से लागू होगा। यह संशोधन राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 के प्रावधानों के अनुसार किया गया है। 56 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं के साथ, निजी वाहन मालिकों के बीच फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।संशोधित दर वैध फास्टैग वाले पात्र गैर-व्यावसायिक वाहनों पर लागू होगी, जो राष्ट्रीय राजमार्गों और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर वार्षिक पास सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं। फास्टैग वार्षिक पास से फास्टैग को बार-बार रिचार्ज करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। एक बार का शुल्क भुगतान एक वर्ष की वैधता या 200 टोल प्लाजा को पार करने के लिए मान्य होता है। यह पास वैध फास्टैग वाले सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए लागू है। राजमार्ग यात्रा ऐप या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की वेबसाइट के माध्यम से एकमुश्त शुल्क का भुगतान करने के बाद वाहन से जुड़े मौजूदा फास्टैग पर वार्षिक पास दो घंटे के भीतर सक्रिय हो जाता है। 15 अगस्त 2025 को लॉन्च किए गए फास्टैग वार्षिक पास को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया इस बात को रेखांकित करती है कि यह देश भर में राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को अधिक सुविधा और लागत प्रभावी यात्रा विकल्प प्रदान करता है।

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सिंधिया ने देश के पहले समृद्ध गाँव में किया समृद्धि केंद्र का उद्घाटन

खबर है..गुना केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र मंत्री एवं गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार 14 मार्च को गुना के उमरी गांव में देश के पहले समृद्धि केंद्र का उद्घाटन किया।दूरसंचार विभाग की समृद्ध ग्राम फिजिटल सेवाएं पहल के तहत यह देश का पहला ऐसा गांव है जहाँ ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और कृषि जैसी सुविधाएं मिलेंगी। सिंधिया ने स्वयं वीआर डिवाइसेज को पहनकर देखा और ग्रामीणों को इसके उपयोग के बारे में बताया।

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अनावश्यक वाणिज्यिक वाहन नहीं गुजरेंगे दिल्ली से

दिल्ली को मिलेगी प्रदूषण से राहत, एआईएमटीसी ने किया सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागतस्वच्छ बीएस-VI वाणिज्य वाहनों को ईसीसी से छूट देने की अपील खबर है..नई दिल्ली दिल्ली को प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय से जबरदस्त पहल हुई है। इससे अनावश्यक रूप से वाणिज्यिक वाहन दिल्ली होकर नहीं गुजरेंगे। इस फैसले का ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने जोरदार स्वागत किया।ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने बताया कि दिल्ली को ट्रांजिट मार्ग के रूप में उपयोग करने वाले वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) बढ़ाने के उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्णय स्वागत योग्य है। दरअसल एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग (सीएक्यूएम) की सिफारिश पर उच्चतम न्यायालय ने वर्तमान ₹2600 से बढ़ाकर ₹4000 की धनराशि निर्धारित है। इसमें हर वर्ष 5% की वृद्धि का प्रावधान रखा गया है।उन्होंने ने बताया कि ईसीसी बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य उन वाणिज्यिक वाहनों को हतोत्साहित करना है जिनका गंतव्य दिल्ली नहीं है और जो दिल्ली के रास्ते से गुजरते हैं, ताकि वे पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का उपयोग करें। इससे राष्ट्रीय राजधानी में अनावश्यक यातायात और प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।”उन्होंने कहा कि हालाँकि, यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि इस निर्णय के क्रियान्वयन के दौरान वास्तविक ट्रांजिट वाहनों की सही पहचान के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्थाएँ निर्धारित की जाएँ। बढ़ा हुआ ECC केवल उन वाहनों पर ही लागू होना चाहिए जो दिल्ली को ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में उपयोग कर रहे हैं, जिसकी पुष्टि संबंधित दस्तावेजों से होती हो, और इसे उन ट्रकों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए जो वास्तव में दिल्ली के भीतर लोडिंग या अनलोडिंग के लिए आ रहे हों। स्वच्छ बीएस-VI वाणिज्य वाहनों को ईसीसी से छूट देने की अपील की गई है।

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आहार-2026: अंतरराष्ट्रीय खाद्य और आतिथ्य मेला

मेले में मिलेगा व्यवसाय को विस्तार का मौकाभारत मंडपम में व्यंजनों के साथ-साथ विचारों की चर्चा खबर है..नई दिल्ली बातचीत की निरंतर चर्चा, ताज़ी बनी हुई कॉफी की सुगंध और अभिनव भोजन प्रदर्शनों के दृश्य ने नई दिल्ली के भारत मंडपम के हॉल को भर दिया। आहार- अंतरराष्ट्रीय खाद्य और आतिथ्य मेले का 40वां संस्करण 10-14 मार्च 2026 तक आयोजित किया गया। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) और भारत व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित, आहार खाद्य और आतिथ्य क्षेत्र के लिए दक्षिण एशिया के सबसे प्रमुख बी2बी मंच में से एक के रूप में उभरा है। प्रदर्शनी को जो चीज़ सबसे अलग बनाती है, वह न केवल भागीदारी का पैमाना है, बल्कि जिस तरह से यह खाद्य और आतिथ्य उद्योग में व्यवसायों के बढ़ने, व्‍यापक होने और विस्तार करने के लिए एक विश्वसनीय नाम और स्रोत के रूप में विकसित हुई है।आहार होटल, रेस्तरां, खानपान संस्थानों, आयातकों, वितरकों और आपूर्तिकर्ताओं को एक साथ लाता है, जिससे एक ऐसा मंच बनता है जहां बातचीत अक्सर व्यावसायिक साझेदारी में विकसित होती है। इन वर्षों में, प्रदर्शनी में एक दिलचस्प प्रवृत्ति देखी गई है: कई उद्यमी जो कभी आगंतुकों या खरीदारों के रूप में भाग लेते थे, अब अपने स्वयं के ब्रांडों के साथ प्रदर्शकों के रूप में आए हैं। उनकी यात्राएं दर्शाती हैं कि मेले में निरंतर भागीदारी से व्यावसायिक अंतर्दृष्टि कैसे प्राप्त हो सकती है, बाज़ार संबंध बन सकते हैं और अंततः उद्यमशीलता के विकास को बढ़ावा मिल सकता है।

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12-दिवसीय ‘ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026’ नई दिल्ली में संपन्न

खबर है..नई दिल्ली जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026’ का शुक्रवार को नई दिल्ली के के.जी. मार्ग स्थित त्रावणकोर पैलेस में भव्य समारोह के साथ समापन हो गया। यह समापन समारोह जनजातीय कला, संस्कृति और रचनात्मकता के 12-दिवसीय उत्सव की परिणति का प्रतीक था। इस उत्सव में देश भर से जनजातीय कलाकारों, समकालीन कलाकारों, सांस्कृतिक समूहों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।प्रदर्शनी में 10,000 से अधिक आगंतुक शामिल हुए, जो भारत की समृद्ध जनजातीय कला परंपराओं के प्रति बढ़ती जन रुचि और सराहना को दर्शाता है। यह उत्सव कलात्मक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन जुड़ाव के लिए जीवंत मंच साबित हुआ, जिसमें 30 से अधिक जनजातीय कला रूपों, 70 जनजातीय कलाकारों और 1,000 से अधिक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के दौरान, समकालीन कलाकारों ने भी जनजातीय कलाकारों के साथ मिलकर काम किया, जिसके परिणामस्वरूप अद्वितीय रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ सामने आईं। उनमें पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक कलात्मक पद्धतियों का सुंदर मेल देखने को मिला।इस उत्सव में व्यावहारिक कार्यशालाएँ, जीवंत कला प्रदर्शन और संवादात्मक सत्र भी आयोजित किए गए, जिससे आगंतुकों को जनजातीय कला रूपों और परंपराओं के साथ करीब से जुड़ने का अवसर मिला। देश के विभिन्न क्षेत्रों के जनजातीय समूहों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पारंपरिक संगीत और नृत्य के प्रदर्शन के माध्यम से इस उत्सव की गरिमा को और अधिक बढ़ाया।समापन समारोह की शुरुआत गणमान्य व्यक्तियों के आगमन और प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ हुई, जिसके बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया। इस कार्यक्रम की शोभा मुख्य अतिथि के रूप में माननीय केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने बढ़ाई। माननीय केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, और जनजातीय कार्य मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने विशिष्ट अतिथि के रूप में इसमें भाग लिया। इस अवसर पर जानी-मानी इन्फ्लुएंसर जय मदान और फिक्की से ज्योत्सना सूरी भी जनजातीय कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उपस्थित रही।

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